प्रतिरोध क्या है और उसके प्रकार,सूत्र और प्रतिरोध मान अंकन | What is resistance and its types, formula and Marking of Resistance Value in Hindi

 प्रतिरोधक (Resistor ) क्या है

प्रत्येक पदार्थ स्वभावत : विद्युत धारा प्रवाह का विरोध करता है ( क्योंकि प्रत्येक क्रिया की प्रतिक्रिया होती है ) । ” जब किसी पदार्थ के टुकड़े अथवा उससे बने , तार के एक अंश को एक निश्चित प्रतिरोध मान प्रस्तुत करने वाले पुजें  (component ) का रूप दे दिया जाता है , तो वह प्रतिरोधक कहलाता है । 

प्रतिरोधक , इलैक्ट्रॉनिक परिपथों का एक आवश्यक घटक है । अनेक प्रकार के वैद्युतिक परिपथों में भी प्रतिरोधक की आवश्यकता होती हैं ; जैसे – फैन रेगुलेटर , डी . सी . जनित्र का वोल्टेज रेगुलेटर , फ्लोरोसेन्ट ट्यूब का डी . सी . परिपथ , नियोन टैस्टर आदि । यह पुर्जा किसी परिपथ में आवश्यक मान का प्रतिरोध प्रस्तुत कर विद्युत धारा प्रवाह के मान को नियन्त्रित करता है और फलत : वोल्टेज ड्रॉप पैदा करता है । 

प्रतिरोध की परिभाषा

 वह पदार्थों का वह स्वभाविक गुण जिसके कारण वह अपने में से होने वाले विद्युत धारा प्रवाह का विरोध करे , प्रतिरोध कहलाता है । प्रतिरोध का प्रतीक R है । प्रतिरोध का मात्रक ओम  होता है ।प्रतिरोध का आकार शक्ति पर निर्भर करता है , प्रतिरोध पर नहीं । 

चालक के प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारक :

( i ) तापमान ( Temperature ) तापमान बढ़ने से चालक का प्रतिरोध बढ़ता तथा घटने से घटता है । 

( ii ) पदार्थ की प्रकृति ( Nature of substance ) अलग – अलग धातुओं के तार का प्रतिरोध अलग – अलग होता है । 

( iii ) लम्बाई ( Length ) चालक तार की लम्बाई बढ़ने से प्रतिरोध बढ़ता है और घटने से घटता है । अर्थात् 

R∝l.   ———-(i)

( iv ) अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल ( Cross Sectional Area ) अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के घटने से उस चालक का प्रतिरोध बढ़ता है और बढ़ने से प्रतिरोध घटता है । .

R∝l/A.     ———–(ii)

समीकरण (i) और (ii) से

R∝l/A

R = pl/A

p (RHO) चालक का प्रतिरोधकता है

प्रतिरोधक कितने प्रकार के होते हैं

1. कार्बन प्रतिरोधक तथा 

2. बायर बाउण्ड प्रतिरोधक 

1. कार्बन प्रतिरोधक Carbon Resistor 

ये प्रतिरोधक कार्बन अथवा ग्रेफाइट के महीन चूर्ण को किसी उपयुक्त अचालक व बन्धक पदार्थ के साथ मिलाकर तैयार किए जाते हैं । ये प्रकार के होते हैं । 

( i) नियत मान प्रतिरोधक Fixed Resistor 

इन्हें बनाने के लिए कार्बन चूर्ण एवं बन्धक पदार्थ से बनाई गई लेई ( paste ) को महीन छड़ों के रूप में ढाल लिया जाता है । अब आवश्य प्रतिरोध मान के अनुसार छड़ में से टुकड़े काट लिए जाते हैं । प्रत्येक टुकड़े के दोनों ओर एक – एक धात्विक टोपी लगाकर उससे एक संयोज तार जोड़ दिया जाता है । यह संयोजक तार , टिन आलेपित , ताँबे का तार होता है । ये प्रतिरोधक । ओह्म से 20 मैगा ओह्म तक प्रतिरोध तथा 1 वाट से 2 वाट तक वाटेज में बनाए जाते हैं ।

( ii ) परिवर्ती मान प्रतिरोधक Variable Resistor

इन्हें बनाने के लिए कार्बन चूर्ण एवं बन्धक पदार्थ से बनाई गई लेई को चन्द्राकार पट्टी ( arc shaped strip ) के रूप में ढाल लिया जाता है । इस पट्टी को उपयुक्त अचालक आधार पर कसकर इसके दानों सिरों पर एक – एक संयोजक जोड़ दिया जाता है । पट्टी के ऊपर एक चल भुजा इस प्रकार लगाई जाती है कि उसका सम्बन्ध , मध्य संयोजक से बनारो मध्य सयोजक तथा किसी एक सिरे के संयोजक के बीच परिवर्ती प्रतिरोध मान प्राप्त किया जा सकता है । ये प्रतिरोधक 100 ओह्म से । मैगा ओह तक प्रतिरोध तथा 0.05 वाट से ( 0.25 वाट तक वाटेज में बनाए जाते हैं । 

2. वायर वाउण्ड प्रतिरोधक Wire Wound Resistor 

ये प्रतिरोधक यूरेका अथवा मैगनिन नामक मिश्र धातु के महीन व नंगे , तार की चीनी मिट्टी , सेरामिक या बँकेलाइट से बने पाइप / शीट पर लपेटकर तैयार किए जाते हैं । इनकी विद्युत धारा वहन क्षमता ( वाटेज ) , कार्बन प्रतिरोधकों की अपेक्षा अधिक होती है । ये भी दो प्रकार के होते हैं 

( 1 ) नियत मान प्रतिरोधक Fixed Resistor 

ये प्रतिरोधक उपरोक्त विधि से 0.1 ओह्म से 50 किलो ओह्म तक प्रतिरोध तथा 1 वाट से 50 वाट तक वाटेज में बनाए जाते हैं । औद्योगिक उपयोग हेतु 50 वाट से अधिक वाटेज के प्रतिरोधक भी बनाए जाते है । 

 ( ii ) परिवर्ती मान प्रतिरोधक Variable Resistor

 ये प्रतिरोधक यूरेका अथवा मैंगनिन नामक मिश्र धातु के , तार को चन्द्राकार चीनी मिट्टी के पाइप पर लपेटकर बनाए जाते हैं । कार्बन परिवर्ती प्रतिरोधक की भाँति इनमें से चल – भुजा तथा तीन संयोजक होते हैं । ये सामान्यतः 5 ओह्म से 5 किलोओह्म तक प्रतिरोध तथा 1 वाट से 50 वाट तक वाटेज में बनाए जाते हैं ।

 रिहोस्टेट ( rheostat ) भी एक प्रकार का परिवर्ती प्रतिरोधक है । इसकी संरचना एक स्टैण्ड में कसे हुए बेलन के समान होती है । इसकी चल – भुजा एक धात्विक छड़ पर गति करती है । इसका उपयोग प्रयोगशालाओं में किया जाता है ।  

प्रतिरोधकों पर ताप परिवर्तन का प्रभाव Effect of Variation of Temperature on Resistors 

किसी पदार्थ का प्रतिरोध उसकी लम्बाई , अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल एवं विशिष्ट प्रतिरोध के अतिरिक्त उसके चारों ओर के वातावरण के तापमान पर भी निर्भर करता है । अधिकांश धातुओं एवं मिश्र धातुओं का प्रतिरोध , तापमान वृद्धि से बढ़ता है जबकि अधिकांश अधातुओं , अर्द्धचालकों एवं अपघट्य विचलनों ( electrolytes ) का प्रतिरोध , तापमान वृद्धि से घटता है । पदार्थ के इन्हीं गुणों का उपयोग विशिष्ट प्रकार के प्रतिरोधकों के निर्माण में किया जाता है । कुछ विशिष्ट प्रतिरोधक निम्नवत् हैंं

विशेष प्रकार के प्रतिरोधक Special Types of Resistors 

कार्बन तथा वायर वाउण्ड प्रतिरोधकों के अतिरिक्त कुछ विशेष प्रकार के प्रतिरोधक भी बनाए गए हैं जिनका उपयोग वैद्युतिक तथा इलैक्ट्रॉनिक परिपथों में विशेष कार्य निष्पादन हेतु किया जाता है । ये प्रतिरोधक निम्नवत् हैं 

( i ) PTC प्रतिरोधक Positive Temperature Coefficient Resistor or Thermistor 

इस प्रकार के प्रतिरोधक का प्रतिरोध मान , बाहा तापमान अथवा आपूर्ति वोल्टता वृद्धि से बढ़ जाता है । यह निकिल ऑक्साइड , मैग्नीज ऑक्साइड एवं कोबाल्ट ऑक्साइड के मिश्रण से बनाए जाते हैं । इसका उपयोग ट्रांसिस्टर परिपथों में बायस स्थिरीकरण ( bias stabilisation ) हेतु किया माता है । इस प्रकार के प्रतिरोधक का प्रतिरोध मान , प्रतिरोधक का तापमान बढ़ने अथवा प्रतिरोधक में प्रवाहित धारा का मान बढ़ने से बढ़ जाता है ।

( ii ) NTC प्रतिरोधक Negative Temperature Coefficient Resistor 

इस प्रकार के प्रतिरोधक का प्रतिरोध मान प्रतिरोधक का तापमान बढ़ाने अथवा प्रतिरोधक में प्रभावित धारा का मान बढ़ाने से बढ़ जाता है यहां  ग्रेफाइट से बनाया जाता है । जैसे – धर्मिओनिक ट्यूब फिलामेन्ट परिपथ , वोल्टता स्थिरक , टाइमर परिपथ आदि । 

( iii ) VDR प्रतिरोधक Voltage Dependent Resistor 

इसका प्रतिरोध मान आपूर्ति वोल्टता पर निर्भर करता है अर्थात् आपूर्ति वोल्टता अधिक होने पर इसका प्रतिरोध मान बढ़ जाता है जिससे परिपथ प्रवाहित होने वाली धारा का मान घट जाता है । इसका निर्माण कार्बाइड चूर्ण से सैरामिक बाइण्डर पदार्थ की सहायता से किया जाता है । इसका उपयोग आपूर्ति वोल्टता में होने वाले असामान्य परिवर्तनों को नियन्त्रित करने के लिए किया जाता है । 

( iv) LDR प्रतिरोधक Light Dependent Resistor 

इस प्रकार के प्रतिरोधक का प्रतिरोध मान , प्रकाश किरणों के आपतन से घट जाता है । इसका निर्माण सिलीनियम नामक पदार्थ से किया जाता है । इसका उपयोग प्रकाश नियन्त्रित नियन्त्रक परिपथों में किया जाता है । जैसे — कार या टॉर्च के प्रकाश से खुलने वाला द्वार , स्वतः ‘ ऑन / ऑफ होने वाली स्ट्रीट लाइट , प्रवेश गणक यंत्र आदि । 

प्रतिरोध मान अंकन ( Marking of Resistance Value ) क्या है

नियत सान कार्बन प्रतिरोधकों के अतिरिक्त अन्य सभी प्रकार के प्रतिरोधकों का प्रतिरोध मान , वाटेज आदि अंकों एवं अक्षरों के द्वारा उनकी बॉडी पर अंकित पर दिया जाता है । नियत मान कार्बन प्रतिरोधकों का आकार इतना छोटा होता है कि उनकी बॉडी पर अंकों तथा अक्षरों के द्वारा मान अंकित करना कठिन होता है और साथ ही अंकित मान को पढ़कर अनेक प्रतिरोधकों में से आवश्यक मान का प्रतिरोधक खोज पाना असुविधाजनक होता है । विभिन्न रंगों के द्वारा By Means of Different Colours प्रतिरोधकों पर मान अंकित करने की विधियों के आधार पर नियत मान कार्बन प्रतिरोधक ‘ बैण्ड टाइप ‘ तथा ‘ बॉडी टापइ ‘ प्रकार के होते हैं । जिनका विवरण निम्नवत है 

( 1 ) बैण्ड टाइप Band Type 

इस विधि में प्रतिरोधक की बॉडी पर एक किनारे से विभिन्न रंगो की चार पट्टियाँ ( band or ring ) अंकित की जाती है । पहली पट्टी का रंग प्रतिरोध मान के पहले अंक को , दूसरी पट्टी का रंग दूसरे अंक को , तीसरी पट्टी का रंग गुणक को तथा चौथी पट्टी का रंग प्रतिशत सहनसीमा को व्यक्त करता है ।

प्रतिरोध क्या है और उसके प्रकार,सूत्र और प्रतिरोध मान अंकन

( ii ) बॉडी टाइप Body Type 

इस विधि में प्रतिरोधक की पूरी बॉडी को एक रंग से रंगा जाता है । अब दूसरे रंग से एक सिरे को रँगा जाता है और बॉडी पर भिन्न रंगों की एक वृत्ताकार तथा एक आयताकार बिन्दी अंकित की जाती है । प्रतिरोधक की बॉडी का रंग प्रतिरोध मान के पहले अंक को , सिरे का रंग दूसरे अंक को , बिन्दी का रंग गुणक को तथा आयताकार चिन्ह का रंग प्रतिशत सहनसीमा को व्यक्त करता है ।

प्रतिरोधों का समूहन ( Combination of Resistances ) : 

प्रतिरोधों का दो तरीके से समूहन किया जाता है 

( i ) श्रेणी क्रम ( Series ) 

( ii ) समानांतर क्रम ( Parallel )

( i ) श्रेणी कम समूहन ( Series combination ) 

इसमें पहले प्रतिरोध का दूसरा सिरा दूसरे प्रतिरोध के पहले सिरे से तथा दूसरा प्रतिरोध का दूसरा सिरा तीसरे प्रतिरोध के पहले सिरे से जुड़ा होता है और यही क्रम आगे तक रहता है । 

R = R₁ + R₂ 

इसमें धारा समान तथा voltage भिन्न – भिन्न होता है । यह ओम के नियम के अनुसार होता है । 

( ii ) समानांतर कम समूहन ( Parallel Combination )

 इस समूहन में सभी प्रतिरोध का पहला सिरा एक साथ तथा दूसरा सिरा एक साथ जुड़ा होता है ।

1/R = 1/R₁ +  1/R₂

R = R₁R₂/R₁+R₂

इसमें वोल्टेज समान तथा विद्युत धारा भिन्न-भिन्न होती है

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